न चाह कर भी चाहने कि आदत हो गई है
चाह कर भी चाहने की आदत हो गई है
चाहने की चाहत तो हमे भी नही थी लेकिन
न चाहकर भी चाहने की चाहत हो गयी है, अब क्या करे?

समन्दर व दरीया:
समन्दर लहरो को लहराति है, रह्-रह कर दिल को उसकी याद आती है,
वो फिर दिल मे बस जाती है, दरिया गम्भीर व शान्ति दरशाति है,
फिर भी उसकी याद दिल से नही जाती है, हर दिन हर पल उनकी याद शताती है, अब क्या करे?
नाम्-गुलाब साहु
चन्द्रपुर [छ ग.]

PostHeaderIcon बागो कि जाम्{नशा}


हवाओ ने पैगाम लाएहै कि बागो मे भी जाम होती है,लेकिन
कभी किसी को नही चडती है,जब चडती है तो कभी नही उतरती है
वह जाम क्या है? क्या वह कोई फूल है या कली है मुझे भी नही पता,
हा लेकिन इतना बता सकता हू कि वह महक्ती है,हा-हा वह गुलाब है.
गुलाब साहु [ मात्राये सुधार कर पडे धन्यावाद.]

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