भारतीय अर्थव्यवस्था में रिकॉर्ड वृद्धि


भारत की अर्थव्यवस्था में पिछले साल 9.4 प्रतिशत की रिकॉर्ड वृद्धि हुई, जो करीब दो वर्षों में सबसे तेज दर है । परंतु आगामी वर्ष में वृद्धि का स्तर कुछ कम हो सकता है ।

सरकार ने कहा है कि मार्च में समाप्त होने वाले वित्तीय वर्ष में 9.4 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई, जो पूर्व अपेक्षाओं से कहीं अधिक है । 1989 के बाद यह सबसे तेज वृद्धि है और इसकी वजह उत्पादन, निर्यात और सेवा क्षेत्रों का मजबूत विकास है ।

वित्त मंत्री पी. चिदंबरम का कहना है कि लगातार पांचवें साल 8 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि दर से लगता है कि भारत में उच्च वृद्धि के जारी रहने के बारे में शंकाएं दूर करने का समय आ गया है ।

स्वतंत्र विश्लेषक इससे सहमत हैं और उनका कहना है कि अगले 5 से 6 वर्षों में अर्थव्यवस्था में मजबूत वृद्धि होते रहने की संभावना है ।

अर्थशास्त्री बी.के जोशी ने कहा कि हाल के वर्षों में बढ़ती हुई घरेलू मांग के कारण सीमेंट और स्टील से लेकर वाहन और दूर-संचार के क्षेत्रों में पूंजीनिवेश बढ़ा है । उन्होंने कहा कि मांग इतनी ज्यादा है कि उसे पूरा करने की मौजूदा क्षमता कम पड़ रही है, इसलिए बहुत अधिक पूंजीनिवेश हो रहा है, जिसकी वजह से अब वृद्धि हो रही है ।

परंतु अर्थशास्त्रियों का कहना है कि आगामी वर्ष में वृद्धि की दर में मामूली कमी आ सकती है, क्योंकि बैंकों ने अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने के प्रयास में उपभोक्ताओं को कम ब्याज पर ऋण देना बंद कर दिया है ।

उनका यह भी मानना है कि भारत में 10 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि होने की संभावना नहीं है, जैसी कि चीन में हो रही है ।

श्री जोशी का कहना है कि देश में बुनियादी ढांचे की भारी कमी की वजह से भारत की पूरी संभावनाओं का उपयोग नहीं हो पा रहा है । उन्होंने कहा कि मौजूदा वृद्धि दर को 10 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ाना एक चुनौती होगी । बिजली के बढ़ते मूल्य और उसका विश्वसनीय न होना, बंदरगाहों का तंग होना, हमारी वृद्धि को धीमा कर सकता है ।

परंतु कुल मिलाकर आशावाद का माहौल बना हुआ है, जो देश के शेयर बाजारों में परिलक्षित हो रहा है ।

(यह लेख व्हाईस ऑफ अमेरिका के हिंदी आवृत्ती से लिया गया है|)
http://www.voanews.com/hindi/