हिंदी भाषा भारत में राजभाषा के रूप में स्वीकृत है । लेकिन हिंदी आज संपर्क भाषा के रूप में विकसित हो रही है । आज हिंदी कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक और कच्छ से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक हर जगह समझी व बोली जा रही है । इतना ही नहीं हिंदी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बना रही है । और यह सरकारी प्रयासों से नहीं बल्कि एक काम चलाऊ भाषा बनकर उभर रही है । एक प्रकार की फंक्शनल (प्रयोजनमूलक) हिंदी, बाजारी हिंदी, उपभोक्ता समाज की हिंदी, जो व्यवहारकर्ता को काम की नजर आती है । हिंदी का यह रूप बहुत संवादमूलक हिंदी है । यह एकतरह से गिटपिटिया हिंदी है । यह एक तरह से तेज गति की हिंदी है, जो अपने पुराने धीमी गति के प्रवाह से मुक्त हो तेजी से मीडिया, फिल्म, टेलीविज़ज में बहुत ज्यादा बोली जाने वाली हिंदी है । इतना ही नहीं इंटरनेट पर और मोबाइल पर भी इसका यह रूप विभिन्न रंगों में देखा जा सकता है । इस कामचलाऊ हिंदी में आजकल लगभग हर भाषा के लोग बात करते हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसका प्रयोग व्यापक स्तर पर व्यवह्रत है । इसी कामचलाऊ भाषा में लोग मनोरंजन कर रहें हैं और सांस्कृतिक विरासत की भाषा भी यही कामचलाऊ हिंदी है । इससे पूरा मनोरंजन उद्योग जुड़ा है । विज्ञापन जगत में हिंदी छा चुकी है । हिंदी भाषा में इतनी बड़ी पूंजी का निवेश हो रहा है, वह बड़े पैमाने पर विज्ञापन और कारोबार में पैठ जमाती जा रही है ।
इतना कुछ हिंदी में हो रहा है कि हिंदी का भविष्य उज्ज्वल कहा जा सकता है ।