प्रसिद्ध दार्शनिक नीत्शे ने कहा है :

विशाल जन-समूह निरे साधन हैं
अथवा रुकावटें
या नकलें हैं
महान कार्य ऐसी सामूहिक हलचल पर
निर्भर नहीं हुआ करते,
क्योंकि सर्वोत्तम और सर्वश्रेष्ठ का भी
जन-समूह पर कोई
प्रभाव नहीं !

कितना सही कहा है । सर्वोत्तम और सर्वश्रेष्ठ हमेशा भीड़ से अलग अकेला खड़ा होता है और हर सफल इंसान सफल इस लिए होता है क्योंकि वह भीड़ से अलग कुछ विशेष रखता है । दूसरी ओर यह भी सच है कि सर्वोत्तम और सर्वश्रेष्ठ का भी जन-समूह पर कोई प्रभाव नहीं ! कितने लोग सर्वोत्तम और सर्वश्रेष्ठ रचनाएँ, फिर चाहे वे कलात्मक फिल्में हों या उत्कृष्ट साहित्य पसंद करते हैं । निश्चित ही सर्वोत्तम सर्वोत्तम को ही प्रभावित कर सकता है ।

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