सत्य कहाँ है

जिसे खोजते जीवन बीता
ढूंढ सका ना, रहा ही रीता
दीर्घ डगर और अन्तिम वेला
अब ढूंढो- अमरत्व कहाँ है
सत्य कहाँ है?

आए खाली, जाए खाली
क्यों कर ऐसी, आदत डाली
भौतिक अर्जन!
तत्व कहाँ है?
सत्य कहाँ है?

राह सही थी, तू ही भटका
रहा क्यूँ तेरा, खाली मटका
अब पूंछ रहा क्यूँ
मृत्यु कहाँ है
सत्य कहाँ है?

dr. shekhar rajpoot

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जीवन की रिक्तता, शून्यता का अनुभव जीवन की सांझ-वेला में ही क्यों होता है ?

एक अच्छी भाव-युक्त कविता ।

सुंदर !

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