आओ फ़िर से दिया जलाएँ
प्रेषक विकिपीडिया ( 5 जून, 2007 - 11:53 ) ।
आओ फिर से दिया जलाएं
भरी दुपहरी में अंधियारा
सूरज परछाईं से हारा
अंतरतम का नेह निचोड़ें-
बुझी हुई बाती सुलगाएं।
आओ फिर से दिया जलाएं
हम पड़ाव को समझे मंज़िल
लक्ष्य हुआ आंखों से ओझल
वतर्मान के मोहजाल में-
आने वाला कल न भुलाएं।
आओ फिर से दिया जलाएं।
आहुति बाकी यज्ञ अधूरा
अपनों के विघ्नों ने घेरा
अंतिम जय का वज़्र बनाने-
नव दधीचि हड्डियां गलाएं।
आओ फिर से दिया जलाएं
- अटल बिहारी वाजपेयी
»
- प्रतिक्रिया देने के लिये प्रवेश करे अथवा पंजीयन करे
