कैसी ये जिन्दगी
क्यों ये जिन्दगी बोझ सी लगती है
सुखी हुई घास पर ओस सी लगती है
व्यथित मन- क्या करें हम
आसान राहें भी
जमीदोज सी लगती है
नहीं है अपराध कोई
नहीं है अवसाद कोई
अंतर्द्वंद के आगोश में
खामोश सी लगती है
कैसी ये जिन्दगी
क्यों ये जिन्दगी बोझ सी लगती है
सुखी हुई घास पर ओस सी लगती है
व्यथित मन- क्या करें हम
आसान राहें भी
जमीदोज सी लगती है
नहीं है अपराध कोई
नहीं है अवसाद कोई
अंतर्द्वंद के आगोश में
खामोश सी लगती है
नहीं है अपराध कोई
नहीं है अवसाद कोई
अंतर्द्वंद के आगोश में
खामोश सी लगती है
अंदर की खामोशी को पा लिया है, तो बाहर की अशांति खो जाती है ।
सुंदर भाव अभिव्यक्ति