दुनिया पर न कोई भरोसा
जड़ है ये चैतन्य नहीं है
चैतन्य है सूरत(आत्मा)
मत बन तू मुरख
धन, दौलत, संपत्ति अर्जन.
हैं सब मिथक- तू कर पृथक
किया संग जिसने दुनिया का
चढा रंग जिस पर दुनिया का
वह खपा सदा ही इस दुनिया में
रह जायेगी केवल सूरत
जिस पर कोई प्रतिबन्ध नही है
दुनिया पर न कोई भरोसा
जड़ है ये चैतन्य नही है
दुनिया पर न कोई भरोसा
जड़ है ये चैतन्य नहीं है
चैतन्य है सूरत(आत्मा)
मत बन तू मुरख
जो जड़ है दुनिया, उस पर भरोसा करने या न करने का प्रश्न नहीं
प्रश्न है स्वयं के चैतन्य में स्थित हो जाने का
अप्प दिपो भव !
सुंदर... सृजन