गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ

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आपको भी देश के लिए मरता है सैनिक, नहीँ रो पाती पत्नि उसकी बेवा होकर। फ़क्र करता है वृद्ध पिता, बुढ़ापे की लाठी खो कर। पिता की गोद तलाशता बच्चा रोता है॥ और इधर..... कुर्बानी की पावन धरा पर, जब कोई राजनेता राजनीतिक स्वार्थ के बिज बोता है। तो सच कहुँ मेरे दोस्त, मुझे भी कुछ कुछ होता है॥ कवि- मथुरा प्रसाद वर्मा "प्रसाद" पखाँजुर,काँकेर(छ. ग.)

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