जीतिए ढेरों ईनाम (यूनिकवि एवम् यूनिपाठक प्रतियोगिता में भाग लीजिए)
प्रेषक व्यवस्थापक ( 2 जुलाई, 2007 - 15:41 ) ।
हिन्द-युग्म यूनिकवि एवम् यूनिपाठक प्रतियोगिता के आयोजन की यह सातवीं उद्घोषणा है। हर बार प्रतियोगिता में नये आकर्षण जुड़ते रहते हैं। हमारी कोशिश रहती है कि अधिक से अधिक लेखकों और पाठकों को कुछ न कुछ भेंट कर पायें। चूँकि हमारा सारा आयोजन-प्रयोजन अंशदान पर अवलम्बित है, अंशदानकर्ताओं की संख्या कम है, इसलिए हर बार अपनी मर्ज़ी का नहीं कर पाते। पिछले दो बार से डॉ॰ कुमार विश्वास और कवि कुलवंत सिंह द्वारा अपनी काव्य पुस्तकें दिए जाने से हम १२-१४ लेखकों-पाठकों को पुरस्कृत कर पाये।
अंतरजालीय कवियों को प्रोत्साहन मिलता रहे, इसके लिए हमने अपनी नीतियों में भी परिवर्तन किया है। अभी तक अंशदानकर्ता होने की प्रथम शर्त यह थी कि वह रोज़गाररत हो, स्थाई सहयोग दे पाये। इससे कई विद्यार्थी, गृहणियाँ आदि हमसे नाराज़ भी थीं। एक पाठक सुनील डोगरा ज़ालिम के एक तर्क ने हमारे हठ को परास्त कर दिया (उनका कहना है कि मैं धूम्रपान पर होने वाले खर्च को हिन्दी के विकास में लगाना ज़्यादा ठीक समझूँगा। इसलिए अब हमने स्थाई और अस्थाई अंशदानकर्ताओं के विकल्प की व्यवस्था कर दी है। सुनील डोगरा ज़ालिम जी इस बार की प्रतियोगिता में पाँचवें से दसवें स्थान तक के कवियों को अपनी पसंद की पुस्तकें प्रेषित करेंगे।
आपमें से कोई और हमारी आर्थिक या अन्य किसी भी प्रकार से मदद करना चाहता है तो यह अवश्य पढ़े।
(जून माह की प्रतियोगिता के परिणाम सोमवार, २ जुलाई २००७ को प्रकाशित होंगे) इस बार भी हम लेखकों और पाठकों के लिए तमाम पुरस्कार लेकर आये हैं-
१) यूनिकवि को रु ६०० का नकद ईनाम, रु १०० की पुस्तकें और एक प्रशस्ति-पत्र।
२) यूनिपाठक को रु ३०० का नकद ईनाम, रु २०० की पुस्तकें और एक प्रशस्ति-पत्र।
३) क्रमशः दूसरे, तीसरे और चोथे स्थान के पाठकों को कवि कुलवंत सिंह की ओर से उनकी काव्य-पुस्तक 'निकुंज' की स्वहस्ताक्षरित प्रति।
४) क्रमशः दूसरे, तीसरे और चौथे स्थान के कवियों को वेबज़ीन सृजनगाथा की ओर से रु ३००-रु ३०० तक की पुस्तकें।
५) पाँचवें से दसवें स्थान के कवियों को सुनील डोगरा ज़ालिम की ओर से उनकी पसंद की पुस्तकें।
६) टॉप २ कवियों और टॉप २ पाठकों को डॉ॰ कुमार विश्वास की ओर से उनकी पुस्तक 'कोई दीवाना कहता है' की एक-एक स्वहस्ताक्षरित प्रति।
७) यूनिकवि और यूनिपाठक को तत्वमीमांसक (मेटाफ़िजिस्ट) डॉ॰ गरिमा तिवारी से ध्यान (मेडिटेशन) पर किसी भी एक पैकेज़ की सम्पूर्ण ऑनलाइन शिक्षा पाने का अधिकार होगा। (लक पैकेज़ को छोड़कर)
८) यूनिकवि की कविता पर हिन्द-युग्म की पेंटर स्मिता तिवारी के द्वारा बनाई गई पेंटिंग भी प्रकाशित की जाती है।
इतना सबकुछ पाने के लिए आपको करना कुछ नहीं है।
यदि आप यूनिकवि बनना चाहते हैं तो-
१) अपनी कोई अप्रकाशित कविता (जो कि गीत ग़ज़ल, लयबद्ध, अलयबद्ध इत्यादि किसी भी श्रेणी में आती हो) को १५ जुलाई २००७ तक hindyugm@gmail.com पर भेजिए।
(महत्वपूर्ण- मुद्रित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित रचनाओं के अतिरिक्त गूगल, याहू समूहों में प्रकाशित रचनाएँ, ऑरकुट की विभिन्न कम्न्यूटियों में प्रकाशित रचनाएँ, निजी या सामूहिक ब्लॉगों पर प्रकाशित रचनाएँ भी प्रकाशित रचनाओं की श्रेणी में आती हैं।)
२) कोशिश कीजिए कि आपकी रचना यूनिकोड में टंकित हो।
यदि आप यूनिकोड-टाइपिंग में नये हैं तो सरलतम ऑनलाइन टूल 'यूनिनागरी' का प्रयोग करें या सरलतम गाइड लेख यहाँ देखें।
३) परेशान होने की आवश्यकता नहीं है, इतना होने पर भी आप यूनिकोड-टंकण नहीं समझ पा रहे हैं तो अपनी रचना को रोमन-हिन्दी ( अंग्रेजी या इंग्लिश की लिपि या स्क्रिप्ट 'रोमन' है, और जब हिन्दी के अक्षर रोमन में लिखे जाते हैं तो उन्हें रोमन-हिन्दी की संज्ञा दी जाती है) में लिखकर या अपनी डायरी के रचना-पृष्ठों को स्कैन करके हमें भेज दें। यूनिकवि बनने पर हिन्दी-टंकण सीखाने की जिम्मेदारी हमारे टीम की।
यदि आप यूनिपाठक बनना चाहते हैं तो-
१) हिन्द-युग्म पर १ जुलाई से ३१ जुलाई २००७ तक की प्रकाशित अधिक से अधिक प्रविष्टियों (पोस्टों) पर समीक्षात्मक टिप्पणी (कमेंट) कीजिए। घबराइए नहीं, समीक्षात्मक मतलब आप के जी में जो आए, वही लिखिए।
२) हमेशा कमेंट (टिप्पणी) करते वक़्त समान नाम या यूज़रनेम का प्रयोग करें।
३) हम यूनिकोड में की गई टिप्पणियों को वरियता देंगे।
यद्यपि अभी तक पाठकों के बीच उस तरह की सक्रियता नहीं देखने को मिली है जिसकी हमें अपेक्षा है। शायद वो इसलिए क्योंकि पढ़ना लिखने से कई गुना मुश्किल है। फ़िर भी हमें पाठकों पर भरोसा है। उम्मीद करते हैं कि इस बार नियमित पाठकों की संख्या बढ़ेगी।
हिन्द-युग्म पर टिप्पणी कैसे की जाय, इस पर सम्पूर्ण ट्यूटोरियल यहाँ उपलब्ध है।
प्रतिभागियों से भी निवेदन है कि वो समय निकालकर यदा-कदा या सदैव हिन्द-युग्म पर आयें और सक्रिय कवियों की रचनाओं को पढ़कर उन्हें सलाह दें, रास्ता दिखायें और प्रोत्साहित करें।
प्रतियोगिता में भाग लेने से पहले सभी 'नियमों और शर्तों' को पढ़ लें।
तो सोच क्या रहे हैं? आज से ही हमारे इस नेक काम में हिस्सा लेकर हमारे प्रयासों को सफल बनाइए।
प्रेषक : शैलेश भारतवासी
----------------------------------------------------------------------------
इन्टरनेट पर हिंदी के प्रचार प्रसार के लिये इस तरह की प्रतियोगीताएं बहोत काम आती है| इस से पहले भी हिंदीयुग्म ने बहोत अच्छी तरह प्रतियोगीताओं का आयोजन किया है| हिंदीभाषी. कॉम , यह और इस तरह के सभी प्रयासो मे सहयोग देगा |
- प्रतिक्रिया देने के लिये प्रवेश करे अथवा पंजीयन करे

साधु-साधु
मामला हिन्दी के विकास का ही नही वरन् सम्पूर्ण् भारतीय-भाषा मे लिख्रे जा रहे साहित्य की को सन्जाल पर डालने का है...अस्तु जो भी इसमे अवदान कर रहे उन्है नमन्...!!!!