तथास्तु
प्रेषक आजाद ( 10 जुलाई, 2007 - 22:36 ) ।
भगवान का दरबार लगा था। सभी लोगों ने उनसे विभिन्न प्रार्थनाएँ की थीं। एक-एक कर वे उनके सामने प्रस्तुत की जा रही थीं। एक सेठ की प्रार्थना सुनकर परमात्मा को बडा आश्चर्य हुआ।
उसने कहा, 'हे भगवान दु:ख के दिनों में आप मेरा साथ देना। गरीबी आए तो मेरी मदद करना। चकित परमात्मा ने अपने सचिव से पूछा, 'यह तो बडा सुखी-संपन्न सेठ है न? 'जी प्रभु!
सचिव ने पुष्टि की, 'भरापूरा घर है इसका। बेटे-बेटी, नाती-पोते, धन-दौलत, ऐश्वर्य, आपसी प्रेम, मान-मर्यादा सब प्रकार के सांसारिक सुख हैं। दान-धर्म, कर्मकांड में भी पीछे नहीं।
भगवान ने नि:श्वास ली, 'फिर तो इसकी प्रार्थना स्वीकार करनी पडेगी मुझे। तुम ऐसा करो, इसके लिए दु:ख व गरीबी का बंदोबस्त करो ताकि मैं इसकी मदद कर सकूँ। इसीलिए कहा गया है- सकारात्मक सोचो, सकारात्मक बोलो और हर अच्छे-बुरे के लिए परमात्मा का धन्यवाद करो।
- प्रतिक्रिया देने के लिये प्रवेश करे अथवा पंजीयन करे
