बाल कविता - मैया मै हनुमान बनूगाँ
प्रेषक आजाद ( 10 जुलाई, 2007 - 23:15 ) ।
मैया मै हनुमान बनूगाँ
धर्म-सेना का कप्तान बनूगाँ
एक गदा मुझको भी लादे
लाल वर्दी मुझको सिलवां दे
दुष्टो हेतु तूफान बनूगाँ
मैया मै हनुमान बनूगाँ
बड़े- बड़े मैं काम करूगाँ
देश का ऊंचा नाम करूगाँ
भारत की मै शान बनूगाँ
मैया मै हनुमान बनूगाँ
आज ढोंग बढ़ता ही जाए
सब चाहें, भगवान कहलाए
बनूगाँ भक्त, नहीं भगवान बनूगाँ
मैया मै हनुमान बनूगाँ
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बोलो बच्चों कौन बनोगे?
इस पर से बचपन मे पढी हुयी कविता याद आ गयी |
उसमे माता अपने बच्चों से पुछती है की बोलो बच्चों कौन बनोगे? और आगे देश के कई वीर योध्दांओ के बारे मे जानकारी दी गयी थी |
बहुत अच्छा होता है इस बाल्यअवस्था मे बच्चों को अपने संस्कृति से परिचय इस माध्यम से कराना | बहुत लंबा असर रहता है|