हँसो और हँसाओं
प्रेषक आजाद ( 10 जुलाई, 2007 - 23:36 ) ।
दुनिया भी विचित्र है, मुस्कराते व्यक्ति को महान नहीं बताएँगी, जितना उदास,गम्भीर व्यक्ति उतना ही दुनिया को उसमें महानता नज़र आती है।
तीन सन्त थे, सदा मुस्कराते रहते थे। लोग पूछते आपकी शिक्षा,आपका उपदेश?‘‘बस हँसो और हँसाओ’’ वे कहते। नगर-नगर घूमते और चौराहे पर खड़े होकर जोर-जोर से हँसना शुरू कर देते। लोग पूछते यह क्या,तो वे कहते आप भी हँसो।
‘‘हँसो और हँसाओं’’ इस नारे का प्रचार करना ही उनका धर्म था। दुनिया बड़ी परेशान की ये तो कभी दु:खी ही नही होते। क्योकिं दुनिया से किसी की प्रसन्नता नहीं झेली जाती। एक दिन उन तीनों में से एक सन्त की मृत्यु हो जाती हैं। लोग सोचते हैं, आज वे सन्त अवश्य दु:खी होगें? परन्तु उनके पास जाकर क्या देखतें हैं कि वो सन्त जोर-जोर से हँस रहे है। लोग पूछने लगे भई तुम्हारा एक साथी मर गया और तुम हँस रहे हो? ? वे कहने लगे आज तो सारा जीवन ही मज़ाक बन गया, हम सोचते थे, साथ जिएँ-मरेँगे परन्तु मृत्यु ने हमारे साथ अच्छा मज़ाक किया तो मृत्यु की सत्यता पर हँस रहे हैं और हमारे साथी की अन्तिम आज्ञा भी यहीं थी कि उसके मरने पर रोना नही अपितु हँसना है। तथा जो शवयात्रा में शामिल होगें वो भी हँसते-हँसते ही जाएँगें। विचित्र शवयात्रा थी, जैसे बारात जा रही हो। श्मशान मे लोगो ने कहा-स्नान करा दिया जाए? नहीं, ऐसे ही चढ़ा दो, चिता पर। ऐसी ही उसकी इच्छा थी। जब देह को अग्नि दी गई, तो बम-पटाखे,आतिशबाजी चलने लगी। सन्त मरने से पहले अपनी जेब मे आतिशबाजी भर गया था। सारे ठहाका मार कर हँसते-हँसते लोट-पोट हो गए। जाते-जाते भी वह सन्त जी सबको हँसाने का इंतजाम कर गए।
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चुटकले
राजा राम मोहन राय
मैडम- क्या आप मुझे राजा राम मोहन राय के बारे में कुछ बता सकते हैं।
छात्रा - हाँ टीचर, वे चारों पक्के दोस्त थे।
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त्रासदी !
प्रिया : कम्प्यूटर इंसान से ज्यादा फुर्ती से काम क्यों कर लेता है?
प्रियेश : इसलिए, क्योंकि उसे बार-बार फोन जो उठाना नहीं पड़ता।
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मित्र थोडा बदल करके आपका चुटकुला निचे दिया है बुरा मत मानना |
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प्रिया : कम्प्यूटर इंसान से ज्यादा फुर्ती से काम क्यों कर लेता है?
प्रियेश : इसलिए, क्योंकि उसे पास सहेली नही होती |