गीत गाना ही सिखा दो
प्रेषक गिरीशबिल्लोरे ( 15 जुलाई, 2007 - 14:17 ) ।
गीत गाना ही सिखा दो मुस्कुराना भी सिखा दो!
हजारो है धुन तुम्हारी,एक तो मुझको बता दो !!
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रेत के टीले सरीखी देखी है ऊचाईया
गीत के बदले सुना दी तुमने भी रूबाईया,
गीत जीते हो कि झूठे आज तो सच तुम बता दो !!
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चरण्-वन्दन यश का अर्चन मारीचिका है
यश कहो ! कब तक कहा पे रुका है
आज चाहो समय है सम्हल के खुद को बचा लो !!
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आईने से जाके पूछो क्या तुम्हें हासिल हुआ
ज़िंदगी से क्या गया ,और क्या दाखिल हुआ ?
डरो मत उस आईने को आईना जाके दिखा दो !!
** गिरीश बिल्लोरे"मुकुल"
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