हमारी स्वतंत्रता


आज संपुर्ण भारतवर्ष अपनी आजादी के हिरकमहोत्सवी वर्ष को बडे धुमधाम से मना रहा है| हमे स्वतंत्र हुये ६० साल हो चुके है| आज का यह दिन उन विरों को याद करने का है जिन्होने अपनी जान पर खेल कर यह आजादी हमे दी | उन सभी विरों का स्मरण कर उनके योगदान को याद कर आज के इस पावन पर्व पर हमने हमारी इस ६० साल की राहगुजर पर एक नजर डालना जरूरी समझा है|

पिछे मुड कर देखोगे तो यह जान पाओगे की कितना चल चुके हो और आगे देखोगे तो पता चलेगा की और कितना जाना है| यह भूत और भविष्य का तालमेल करने के लिये वर्तमान होता है और इन दोनो को खयाल मे रख कर आपको इस वर्तमान मे कृती करनी होती है| क्योकी क्रियाशिलता का वरदान केवल वर्तमान को ही है| यही वरदान वर्तमान को जिवीत बनाता है|

चले देंखे हम कहां थे साठ साल पहलें|

१५ अगस्त को हमे आजादी मिली लेकीन साथ साथ बटवारे का गहरा जख्म भी था | हमारे राष्ट्रपीता महात्मा गांधी तथा अन्य नेतांओ ने हमे आजादी दिलायी थी| अंग्रेज देश छोडकर जा रहे थे| हमे अपने स्वतंत्र देश की आस थी लेकीन साथ यह बटवारे का शूल भी था|

अंग्रेजों ने जाते जाते देश को टुकडों मे बाटने हेतू यंहा को सभी सरंजामी राजाओं को दोनो मे से किसी भी एक राष्ट्र मे शामील होने अथवा स्वतंत्र रहने की छूट दे रखी थी| सरदार वल्लभभाई पटेल जैसे लोहपुरुष ने आज के भारत को अखंड बनाने मे प्रमुख भुमिका निभाई है| जहां बातचीत से बात बनी वहां बातचीत से और जंहा बल का उपयोग करना पडा वंहा बलपुर्वक उन्होंने देश को अखंड रखा है| वरना आज आंध्रप्रदेश मे पाकिस्तान होता और गुजरामे भी| हमे यह योगदान याद रहें|

हमारे देश के पहले प्रधानमंत्री पं. नेहरू थे| हमारे देश के प्रगती की निंव रखने का काम सही मायनों मे इन्होने किया| साम्यवाद की ओर इनका झुकाव था लेकीन देश को जचें ऐसा विकास करने मे इन्होंने महारत हासील की थी| आंतरराष्ट्रीय मंच पर नेहरू एक साफ छवी वाले नेता बनकर उभरे| अमेरिका और रूस इन दोनो से समान दूरी रखने के लिये शितयुध्द के दौरान इन्होने अलिप्ततावाद का नारा विश्व को दिया और भारतकी अगवाईमे 'नाम'(NAM) की स्थापना की गयी| इसी दौर मे भारतमे १९५१ से पाच सालकी योजना का अवलंब किया गया| पाच साल के लिये विकास का लक्ष तय करना और उस दिशा मे बढना यह मुल उददेश्य था| नेहरू के कार्यकाल मे आज देश के लगभग सभी बडे कामों की नींव रखी गयी थी | जैसे भाक्रा- नानगल की परियोजना हो या चित्तरंजन का रेल इंजन का प्रकल्प , या फिर दामोदर अथवा कोसी नदीयों का विकास , सभी बडी योजनांओ को शुरू कर एक विकसीत भारका सपना देखा था पं. नेहरू ने |
१९६२ को चीन ने हम पर हमला कर हमे बडा झटका दिया था| नेहरू भी 'पंचशिल' को दिल मे लिये थे| वह इस खतरे को भांप नही पायें| इस बार हमने करारी मात खायी थी | इसके बाद जल्द ही नेहरू चल बसे|
उनके बाद लाल बहादूर शास्त्री हमारे देश के प्रधानमंत्री बनें|इनके अल्प कार्यकाल में हमने १९६५ का पाकिस्तान के साथ हूवा युध्द जीता था| उनके बाद हमारे देश की सबसे प्रभावशाली प्रधानमंत्री के रूप मे इंदीरा गांधी का उदय हूवा| शास्त्रीजी के कार्यकाल मे नभोवानी जैसे मंत्रालय का कामकाज सभांलने वाली इंदीरा को गुंगी गुडीया कहा जाता था, इसी गुंगी गुडीयाने आगे जाकर १९७१ मे दुर्गा रूप धारणकर बांग्लादेश को स्वतंत्र कीया| इंदीराजीका कार्यकाल कई मायनो मे देश पर प्रभावशाली रहा है| उनके कार्यकाल मे लिये गये कुछ निर्णयों को याद करे तो यह साफ हो जायेगा| उन्होंने आजका सियाचीन पर अपनी पकड कसी थी| सिक्कीम को भारत मे सामील किया | पुराने राजाशाही पर लाखों रुपयें खर्चे वाले तनखों(पेन्शन) को रद्द किया| तकरिबन बीस बँको का राष्ट्रीयकरण किया, ताकी देश की आर्थीक सत्ता किसी एक के हाथ मे न चली जायें| १९७१ मे बांग्ला युध्द किया और जिता भी|
इसी दौरान १९७४ मे हमने देश का सबसे पहला परमाणु परिक्षण किया, यह राजस्थान मे 'पोखरण' मे हूवा था, और इस मे राजा रमण्णा नाम के वैज्ञानिक का बडा योगदान रहा है| देश को अखंडीत रखने के लिये ही उन्होंने ऑपरेशन ब्ल्यु स्टार किया था , जिसकी किमत उनको अपनी जान से चुकानी पडी| उनको इस की पुरी कल्पना थी लेकीन देश के लिये उन्होंने यह ब्ल्युस्टार को मान्यता दी थी|
इंदीराजी के कार्यकाल मे ही भारत की एकमात्र इमरजेन्सी लगायी गयी थी| यह उनके कार्यकाल की सबसे दुखद घटना मानी जाती है| इस मनमानी के विरोध मे सारा देश सडकों पर उतर आया | चुनाव लिये गयें और पहली गैर कॉग्रेसी सरकार सत्ता मे आयी|
मोरारजी देसाई इस सरकार के प्रमुख थे वही प्रधानमंत्री बने| यह सरकार जादा देर तक नही टीकपायी| पुन्हः चुनाव हूये और इंदीराजी चुनी गयी| १९८४ के ब्ल्युस्टार के कारण उनकी हत्या की गयी| उसके बाद देश के सबसे नौजवान प्रधानमंत्री बने राजीव गांधी| वे राजनीती मे देरसे आये, लेकीन उन्होने तकनिकी दृष्टीसे प्रगत भारत का सपना देखा था| उसी की बदोलत हमने आज 'परम कम्प्युटर' का निर्मान किया, आज देश की सुचना और तकनिकी की जो उंचाई है उसका बीज राजीव गांधी के कार्यकाल मे बोया गया था|
राजीव गांधी के कार्यकाल मे देश के मुसलमानो कों अलगसे पर्सनल लॉ बोर्ड दिया गया| यह बडी दुखद और देश की एकता को प्रभावीत करने वाली घटना घटी| राजीव गांधी का इस तरह मुलतत्ववादी ताकदों के सामने घूटने टेंकना, काँग्रेस की मुसलमानों के सामने झुकने का उदाहरण बन गया है|

राजीव के बाद विश्वनाथ प्रतापसिंह आयें| भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग करने आये प्रतापसिंह ने देश मे मंडल आयोग की शिफारिशों को लागू कर आरक्षण के मुद्दे को देश के पटल पर लाया| पहली बार अयोध्यामे शिलान्यास करने पहूंचे कारसेवकोंपर गोलीया दागी|
सच कहें तो राजीव गांधी की हत्या के बाद देश मे राजकिय अस्थीरता आयी| इसी दौरान चंद्रशेखर का कार्यकाल आया, जिस वक्त हमारे देश की आर्थीक हालत इतनी खराब हूयी की हमे अंतरराष्ट्रीय मुद्रा प्राप्त करने के लिये सोना गिरवी रखना पडा था|
राजीव गांधी के बाद अल्पमत मे होने के बावजूद पुरे पांच साल सरकार चलाने का कारनामा कर दिखाया पी.व्ही नरसिंहराव ने| इनका कार्यकाल आजके भारत की आर्थीक संपन्नताकी शुरवात मानी जाती है|
राव के समय मनमोहनसिंह देश के अर्थमंत्री थे उन्होने , उदारीकरण,नीजीकरण और वैश्वविकीकरण की शुरूवात की| उसी के फलस्वरूप हमने आर्थीक पटलपर इतनी तरक्की की, कुछ सतरासालों में ही , सोना गिरवी रखने वाले हम अब विश्व की आर्थीक महासत्ता बनने का ख्वाब देख रहे है|

नरसिंहाराव के कार्यकाल मे अयोध्याकी बाबरी मस्जीद गिराई गयी| देश मे सांप्रदायीक दंगे हुये| मुंबई मे दंगो के बाद बमविस्फोट हूये| जिनके आरोपियोंको हालमे सजा दी गयी|
राव के बाद अटलबिहारी वाजपेयी ,इंद्रकुमार गुजराल और एच डी देवेगौडा की सरकारें आयी और चली गयी| उसके बाद एक बार फिर से अटल बिहारी वाजपेई की सरकार आयी|
वाजपेई सरकारने देश को विश्व के प्रमुख देशों मे ले जाने की ठाणी| समय सही था और सारथी भी| इनके कार्यकाल मे परकिय व्यापार मे वृध्दी हूयी|आर्थीक विकास का स्तर ७% से अधिक रहा| इनके कार्यकाल मे देश ने दुसरी बार परमानु परिक्षण किया वह साल था मई १९९८ , इस बार इस परिक्षण के निर्माता थे डॉ. ए पी जे अब्दुल कलाम| वाजपेई के कार्यकाल मे कारगील का युध्द हूवा जो हामारी सेना ने बहादूरी का उदाहरण पेश कर जीता था| इन्ही के कार्यकाल मे देश ने सबसे दुखभरा और देश के संन्मान पर आंच आये जैसा विमान अपहरण देखा|
वाजपेयी के कार्यकाल मे हमने संरक्षण, विदेश व्यापार, अंतरिक्ष और सुचना प्रद्योगीकी मे नये मकाम हासील किये है|
वाजपेयी सरकार की हार और सोनीयाजी के नेतृत्व मे कॉग्रेस की जीत से कई लोगों को धक्का सा लगा| सोनीया के विदेशी मुल को लेकर उनके प्रधानमंत्री होने पर सवाल उठायें गयें| डाँ. मनमोहनसिंह का नाम प्रधानमंत्री के रूप मे आगे कर उन्होंने सबकी बोलती बंद कर दी|
आज हमारे देश की नैय्या उनके हाथ मे है जिन्होने हमे यह आर्थीक संपन्नताकी राह नब्बे के दशक मे दिखायी थी| इस दौरान हम ८% से १०% तक की आर्थीक वृध्दी का सपना देख रहे है|
इन साठ साल मे पहली बार हमारे देश के सर्वोच्च पद पर याने राष्ट्रपती पद पर एक महिला आसीन है| हमारे देश की राष्ट्रपती प्रतिभा पाटील|

आज इस पावन पर्व पर हम देश को आगे बढाने के लिये कुछ तो योगदान दे|

जय हिंदी | वन्दे मातरम |

स्वतंत्रता दिवस

एक आम आदमी अपनी तरफ़ से इतना तो कर ही सकता है कि वह नागरिक सुविधाओं को ठीक-ठाक रखे, कानून की इज्जत करना सीखे, और मुख्यतः भ्रष्टाचार के खिलाफ़ लडा़ई लडे़, उसके हाथ में सूचना का अधिकार नामक जो नया हथियार आया है उसका खुलकर उपयोग करे, अपराधी नेताओं की सार्वजनिक भर्त्सना हो।

सुरेश चिपलूनकर (उज्जैन, मप्र)
http://sureshchiplunkar.blogspot.com