चुटकले
प्रेषक आजाद ( 4 अक्तुंबर, 2007 - 08:30 ) ।
नौकर (मालिक से)- जब कोई ग्राहक सामान खरीदने आता है तो आपको कैसे पता चलता है कि ये प्रेमी-प्रेमिका हैं या पति-पत्नी। मालिक ने कहा- जो चुपचाप सामान खरीद ले वह प्रेमी-प्रेमिका, और जो मेरे साथ झगड़ें समझ लेना वो पति-पत्नी हैं।
हीटर और नल-
पति-पत्नी रेलवे स्टेशन पहुंचे तो पत्नी एकदम घबरा कर बोली, 'अजी गजब हो गया। मैं बिजली का हीटर तो जलता ही छोड़ आई हूं।' पति, 'कोई बात- नहीं मैं भी पानी का नल खुला ही छोड़ आया हूं।'
पर्स-
टैक्सी ड्राइवर (यात्री से), 'भाई साहब मैं मीटर चालू करना भूल गया हूं। इसलिए सोच रहा हूं कि आपसे कितने पैसे लूं।' यात्री ने कहा, 'इसमें परेशान होने की कोई बात नहीं है। मैं भी अपना पर्स घर भूल आया हूं।'
दलबदलू नेता-
'कुत्ते को लेकर कहां जा रहे हो?' 'क्या बताऊं यार, मेरे टॉमी ने परसों सुबह-सवेरे शहर के जाने-माने दलबदलू नेता को काट लिया।' 'तब तो तुम्हें बहुत परेशानी हुई होगी?' 'हां, कुछ दिन तो दिक्कत होगी ही' डाक्टर ने कहा है, टॉमी को एक दिन छोड़ कर दस दिन तक पांच इंजैक्शन लगेंगे। यह भी कहा है कि नेता जी पर एक नजर रखना। उनका ठीक रहना बहुत जरूरी है।
जुआ-
एक पति ने अपनी पत्नी से पूछा- युधिष्टिर भी तो जुआ खेलते थे, फिर तुम मुझे क्यों रोकती हो? पत्नी ने कहा- नहीं रोकूंगी। लेकिन याद रखना कि द्रौपदी के भी पांच पति थे।
रोटी-
एक भिखारी ने घर में आवाज लगाई, बाबूजी रोटी मिल जाएगी। अंदर से आवाज आई, बीवी घर में नहीं है। भिखारी ने कहा- मुझे बीवी नहीं, रोटी चाहिए।
वचन-
इंग्लैंड जाने से पहले पति ने पत्नी से कहा- मुझे वचन दो कि मेरे चले जाने पर तुम स्त्रियों के अलावा किसी और को घर में आने नहीं दूंगी और मैं भी इंग्लैंड में ऐसा ही कंरूगा।
स्वर्ग में स्थान-
श्रोता ने संत से पूछा, 'स्वामी जी, धर्मग्रंथों में लिखा है कि सिगरेट पीने से स्वर्ग में स्थान नहीं मिलता। क्या यह सत्य है?' संत ने कहा, 'जी नहीं, सिगरेट आप जितनी ज्यादा पिएंगे, उतनी ही जल्दी स्वर्ग पहुंच जाएंगे।'
वॉकमैन-
मनोरोगी ने डॉक्टर से पूछा, 'महाशय, कई बार मुझे लगता है कि मेरे कान में कोई गुनगुना रहा है।' डॉक्टर ने कहा, 'अच्छा, ऐसा आपको कब लगता है?' मनोरोगी ने कहा, 'जब मैं कान में वॉकमैन लगाकर सुनता हूं।'
बिल-
मेहमान ने बच्चे से कहा- वाह बेटे, तुम तो बहुत समझदार हो। अच्छा बताओ, बादल के साथ चमकने वाली और बल्ब जलाने वाली बिजली में क्या अंतर है? बच्चे ने कहा- जो बिजली बादल के साथ चमकती है, उसका बिल नहीं भरना होता है।
पिटाई-
रमा ने पिता से कहा, 'आज मुझे टीचर ने बहुत मारा। पिता ने कहा, 'जरूर तुमने कोई शैतानी की होगी।' रमा ने कहा, 'नहीं, मैं तो बिल्कुल चुपचाप सो रही थी।
क्रीम की शीशी-
एक महिला (केमिस्ट से): भाई साहब, रात को बच्चों को मच्छर बहुत काटते हैं, कोई दवा दे सकते हैं आप? केमिस्ट ने क्रीम की शीशी दे दी। महिला ने पूछा: यह बच्चों को लगानी है या मच्छरों को
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अब वह मेरी चाची है।
संता (बंता से)- यार बंता मेरी मंगनी टूटने वाली है। प्रीतो ने मेरे साथ विवाह करने से इंकार कर दिया।
बंता (संता से)- क्या तुमने अपने करोड़पति चाचा के बारे में नहीं बताया?
संता- बताया तो था.. अब वह मेरी चाची है।
राजा राम मोहन राय
मैडम- क्या आप मुझे राजा राम मोहन राय के बारे में कुछ बता सकते हैं।
छात्रा - हाँ टीचर, वे चारों पक्के दोस्त थे।
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त्रासदी !
प्रिया : कम्प्यूटर इंसान से ज्यादा फुर्ती से काम क्यों कर लेता है?
प्रियेश : इसलिए, क्योंकि उसे बार-बार फोन जो उठाना नहीं पड़ता।
100 तक गिनती
मां (चिंटू से)- तुमने आज सुधीर से लड़ाई की जबकि मैंने तुमको कई बार समझाया है कि जब भी गुस्सा आए फौरन 100 तक गिनती गिनो।
चिंटू (मां से)- हां मां, मैं तो ऐसा ही कर रहा था पर सुधीर की मां ने उसे 50 तक ही गिनने को कहा था।
मां बच्चा
बच्चा- जुबान तो है मम्मी, लेकिन मैं जुबान से कोई चीज उठा नही सकता।
बुआ
कॉलेज में एक बड़ी उम्र की लड़की ने दाखिला लिया तो सारे लड़के-लड़कियों ने उसे बुआ कहना शुरू कर दिया। कुछ दिनों तक तो उस बेचारी ने सहन किया। अंत में उसने तंग आकर प्रिंसिपल से शिकायत की।
प्रिंसिपल को बड़ा क्रोध आया तो क्लास रूम में पहुंचे और बोले- जो भी इसे बुआ कहता है वह तुरन्त खड़ा हो जाये।
एक-एक करके सारी क्लास खड़ी हो गयी। केवल एक लड़का बैठा रहा। प्रिंसिपल ने बड़ी हैरानी के साथ उस लड़के से पूछा- क्यों भई! तुम इसे बुआ नहीं कहते?
लड़के ने ठंडी सांस भरकर कहा- सर! मैं सारी क्लास का फूफा हूं।
उफ़...ये चुगलखोरियाँ....!!
मुझे उन चुगली पसंन्द लोगों से भले वो जानवर लगतें हैं जो चुगल खोरी के शगल से खुद को बचा लेतें हैं ।। इंसान नस्ल के बारे में किताबें पड़ते है ....!!
अपने आप को श्रेष्ठ साबित करने चुगली करने वालों की आप किसी तरह की सज़ा दें न दें कृपया उनके सामने केवल जानवरों की तारीफ़ कीजिए। कम-अस-कम इंसानी नस्ल किसी बहाने तो सुधर जाए । आप सोच रहें होंगें मैं भी किसी की चुगली भड़ास पर पोस्ट कर रहा हूँ सो सच है ..परन्तु अर्ध-सत्य है .. परन्तु ये चुगली करने वालों की नस्ल के समूल विनिष्टी-करण की दिशा में किया गया एक प्रयास मात्र है।
अगर मैं किसी का नाम लेकर कुछ पोस्ट करूं तो चुगली समझिए । यहाँ उन कान से देखने वाले लोगों को भी जीते जी श्रद्धांजलि अर्पित करना चाहूंगा जो पति धृतराष्ट्र का अनुकरण करते हुए आज भी अपनीं आँखें पट्टी से बाँध के हस्तिनापुर में की साम्राज्ञी बनी कौरवों का पालन पोषण कर रहें है। मेरा सचमुच उनकी चतुरी जिन्दगी में मेरा कोई हस्तक्षेप कतई नहीं है । होना भी नहीं चाहिए । पर एक फिल्म की कल्पना कीजिए जिसमें विलेन नहीं हों हुज़ूर फिल्म को कौन फिल्म मानेगा ...? अपने आप को हीरो-साबित करने मुझे या मुझ जैसों को विलेन बना के पहले पेश करतें है। फिर अपनी जोधागिरी का एकाध नमूना बताते हुए यश अर्जित करने के लिए मरे जातें हैं ।
ऐसा हर जगह हों रहा है....हम-आप में ऐसे अर्जुनों की तलाश है जो सटीक एवं समय पे निशाना साधे ...... हमें चुगलखोरों की दुनियाँ को नेस्तनाबूत जो करना है.....आमीन......