कफन


तुम्हारी यादों ने
कर रखा है आगोश में मुझे
जैसे ओढ रखा हो मैनें कफन
तुम्हारी हंसी....
मौत के बाद की शांति सी प्रतीत होती है
और तुम्हारे प्यार की अग्नि....
लगातार जला रही है मुझे
धीरे-धीरे मेरे अस्तित्व को
बदल रही है इक ठंडी राख में
खुद को ही तर्पण करता हूं तुम्हारे इंतजार में
इससे अच्छा तो हो काश मौत ही
आकर खामोश कर जाती मुझे

................अभिषेक प्रसाद "अवि"...........