आजाद वाणी
प्रेषक आजाद ( 13 दिसंबर, 2007 - 20:53 ) ।
श्री सत गुरु देवाय नम:
आजाद वाणी
1-‘आजाद’ लोभ ना कीजिए,लोभ पाप का मूल
लोभ के मन मे आत ही,धर्म जाए सब भूल
2-‘आजाद’ मांगो मत कछु,मांगन से यश जाए
मागंन से ही देखो हरी, वामन थे कहाए
3-‘आजाद’ सत्संग मे रहो,दु:ख रहेगें दूर
काल माया व्यापे नही,सुख रहे भरपूर
4-‘आजाद’ जग मे है सभी,स्वारथ के ही मीत
झूठे जग के नाते है, झूठी जग की प्रीत
5-‘आजाद’ नाम जपते रहो,गुरु चरणी चित जोड़
सुमिरण के प्रताप से, जग का बन्धन तोड़
ॐ
6-‘आजाद’ गर्व ना कीजिए,धन,योवन को पाय
दो दिन के मेहमान सब,काल सभी को खाय
7-‘आजाद’ जग मे आए कर,उतम कर्म कमाए
धन ना जाए परलोक मे,कर्म ही संग जाए
8-‘आजाद’ इस चंचल मन को, खाली कभी ना छोड़
या तो सेवा करता रह, या सुमिरण मे जोड़
9-‘आजाद’ अच्छी पुस्तके, विद्वानो की मीत
भक्ति-साधन बन सकते है,चित्रकला,संगीत
10-‘आजाद’ मोह ना कीजिए,मोह दु:खो की खान
मोह ममता को छोड़ दे, तभी मिले भगवान
ॐ
11-‘आजाद’ नन्द किशोर से, सच्ची करना प्रीत
इच्छा कोई ना रहे, यही प्रीत की रीत
12-‘आजाद’ मीठा बोलना, सन्तो का है काम
कटु-वचन भी सहन कर,जपना हरदम राम
13-‘आजाद’ जैसे भी भजो,मालिक सब सुन ले
माँ समझे है भाव को, बालक जो भी कहे
14-‘आजाद’ सुविधा-दुविधा है,समझ लेहो मन माहिं
अधिक वस्तु के संग्रह में, अधिक बढ़े कठिनाई
15-‘आजाद’ सुख बाटों सदा, चाहों जो सुखी होना
दु:ख जो दोगें दूजों को, तुमको भी पड़े रोना
- प्रतिक्रिया देने के लिये प्रवेश करे अथवा पंजीयन करे

16-‘आजाद’
16-‘आजाद’ राजा हो गए, जिन्ह लाई प्रभु से प्रीत
बाजा उनका बज गया, माया में जिनका चित
17-‘आजाद’ हिन्दी बोलो सदा, करो हिन्दी का प्रचार
अपनी माँ ही करती हैं, बच्चोंि पर उपकार
18-‘आजाद’ नारी जननी हैं, करो सदा ही आदर
चण्डी बनकर नाश करेंगी,करोगें अगर अनादर
19-‘आजाद’ सन्त करते आए है, सदा ही उपकार
कष्ट सहकर भी करते हैं, जीवो का सुधार
20-‘आजाद’ करें शुभकामना, खूब मनाओ मौज़
खुशियो के सन्देश भेजो, ईक-दूजों को रोज़
21- ‘आजाद’ ऊब चुकें बहुत, देंख लिए माया के रंग
भाईयों अपनी जैराम की, हम चले सन्तों के संग
22-‘आजाद’सगाई ना सन्त करें,सिर न बान्धे मोर
पले पलाए ले भागतें, हैं यहीं सन्तो की टौर
23 -‘आजाद’ अपनी भाषा कों, भारतीय रहे है भूल
विदेश जाने के सपने देंख, युवक रहे है झूल
24 -‘आजाद’ कलियुग में लगी, काम क्रोध की आग
फिर भी इस पापी मन को, नहीं होता वैराग
25 -‘आजाद’ इस संसार में, मतलब का व्यवहार
जब लग पैसा गाँठ में, तब लग सारे यार
26 -‘आजाद’ मरे जो दूजों हित, दूजों हित जो जीता है
उसका हर आँसू रामायण, प्रत्येक कर्म ही गीता है
26 -‘आजाद’ अलोचना मत करो, कुछ करो नवीन रचना
दु:ख न देना सुख बांटना, सबसे बड़ी यही अर्चना
27 -‘आजाद’ प्रेम की आग में, हम तो जले दिन रैन
श्याम-दर्श कारण सखी, मेरे नैंन सदा बेचैन
28 -‘आजाद’ महत्व दीजिए, सदा धन से ज्याहदा वस्तु को
वस्तु् से ज्यावदा व्यक्ति को, व्योक्ति से ज्या दा सन्तोंक को
29 -‘आजाद’ स्वीर्णं के सिक्कों से, भक्ति को न तोल
भक्ति मिलती मोल तो, राजा ले लेते तोल
30 -‘आजाद’ कलह-चिन्ता सभी, सतसंगत से जाय
दु:ख लवलेश रहे नहीं, सुख में रहे समाय
31 -‘आजाद’सुख-दु:ख दोनों ही, बिन बुलाय ही आयें
रात दिवस की भांति ही, बिन प्रयास टर जायें