यह जालस्थल

समाज में नारी की उपेक्षा


कैद


आस्वाद लेते फ़ल-फ़ूलों का आकाश में विहंगरत पंछी बहुरंगी
पंख मखमल से हे मेरे मनके स्वच्छंद सुकुमार करते हो स्मृती-
गगन को पार अब-सो गया तुम्हारा सुरा-स्वर स्वर्ण-पिंजडेमें
वियोग की दशामें क्या कर पाओगे?

हिंदीभाषी से आपकी अपेक्षांएं |


हिंदीभाषी के सभी सदस्योंसे यह आवाहन है की इस जगह पर आपको हिंदीभाषी इस जालस्थल से क्या अपेक्षांएं है तथा आपकी अपेक्षांओं पर हिंदीभाषी कितना खरा उतर रहा है इस बारे में लिखे|

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