कविता

इंतजार


बाहर भागता अन्धेरा
और दूर कहीं नजर आती
इक रौशनी...
अन्धेरे के बीच अपना अस्तित्व बचाती
बाहर इक अथाह शांति
और भीतर
मन में तुम्हारी यादों की हलचल
कितने ही छोटे-छोटे स्टेशन
इन अन्धेरों में गुजर गये
बिल्कुल हमारी-तुम्हारी

ठहराव


यह
चलती हुई ट्रेन,
दिला रही है
अहसास मुझे,
मेरी हर पल
भागती-दौडती
जिंदगी,
और मैं
उसमें
ठहरा हूआ.....

....................अभिषेक प्रसाद "अवि"...........

कफन


तुम्हारी यादों ने
कर रखा है आगोश में मुझे
जैसे ओढ रखा हो मैनें कफन
तुम्हारी हंसी....
मौत के बाद की शांति सी प्रतीत होती है
और तुम्हारे प्यार की अग्नि....
लगातार जला रही है मुझे
धीरे-धीरे मेरे अस्तित्व को
बदल रही है इक ठंडी राख में

अनुभुति


युं हीं बैठे बैठे
सुबह हो गई,
और मेरी आंखो में
इक पल भी नींद न आई,
बातें किए हुए तुमसे,
कुछ ही घंटे तो बीते हैं,
पर इन कुछ घंटो को
सदियों सा जिया है मैंने,
कई खुशियों ने दस्तक दी मेरे मन में
कई डरों ने कब्जा किया मेरी आंखो पर

शोक मे डूबे हुए पल नियति करती लग रही छल ...


शोक मे डूबे हुए पल
नियति करती लग रही छल
वेदना के शूल चुभते
आंख झरती आज पल-पल,
ईश्वर की व्यवस्था
शोक भी है तय अवस्था !
आपकी इस वेदना में साथ हैं हम !
दूर से ही भले साथी
संवेदना का अनुनाद हैं हम !!
शोक में विश्वास प्रभू का तोड़ना मत

तूफानों की ओर घुमा दो नाविक


तूफानों की ओर घुमा दो नाविक निज पतवार ।

आज सिन्धु ने विष उगला है
लहरों का यौवन मचला है
आज ह्रदय में और सिन्धु में
साथ उठा है ज्वार

तूफानों की ओर घुमा दो नाविक निज पतवार ।

लहरों के स्वर में कुछ बोलो
इस अंधड में साहस तोलो

मैं तुम्हारा खत आख़िरी जाने किस के हाथ आऊँ


मैं तुम्हारा खत आख़िरी जाने किस के हाथ आऊँ
तुम पडो इक बार मुझको इक नया संचार पाऊं !
कौन किसकी वेदना पडने चला,
कौन ऊँचे श्रंग पर चडने चला!
कहते हैं गंगा उसे अरु पूजते भी
पीर गिरि की कौन है पड़ने चला !
सोचता हूँ हाल गिरि का पूछ आऊँ .

गीत गाना ही सिखा दो


गीत गाना ही सिखा दो मुस्कुराना भी सिखा दो!
हजारो है धुन तुम्हारी,एक तो मुझको बता दो !!
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रेत के टीले सरीखी देखी है ऊचाईया
गीत के बदले सुना दी तुमने भी रूबाईया,
गीत जीते हो कि झूठे आज तो सच तुम बता दो !!
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सरफ़रोशी की तमन्ना-राम प्रसाद बिस्मिल


सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
देखना है ज़ोर कितना बाज़ुए कातिल में है

करता नहीं क्यूँ दूसरा कुछ बातचीत,

बाल कविता - मैया मै हनुमान बनूगाँ


मैया मै हनुमान बनूगाँ
धर्म-सेना का कप्‍तान बनूगाँ

एक गदा मुझको भी लादे
लाल वर्दी मुझको सिलवां दे
दुष्‍टो हेतु तूफान बनूगाँ
मैया मै हनुमान बनूगाँ

बड़े- बड़े मैं काम करूगाँ
देश का ऊंचा नाम करूगाँ
भारत की मै शान बनूगाँ

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