नीति
प्रेरक प्रसंग - छोटा या बड़ा
प्रेषक आजाद ( 10 जुलाई, 2007 - 23:05 ) ।
मगनबाड़ी आश्रम में महात्मा गाँधी ने एक बार यह योजना बनाई कि सबके जूठे बरतन बारी-बारी से दो-तीन व्यक्ति मांजा करें । इससे आश्रमवासियों में प्रेम भाव बढेगा तथा एक दूसरे के बर्तन साफ करने से जो घृणा होती है उससे भी छुटकारा मिलेगा ।
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हिंदीभाषी से आपकी अपेक्षांएं |
प्रेषक व्यवस्थापक ( 8 जुलाई, 2007 - 13:38 ) ।
हिंदीभाषी के सभी सदस्योंसे यह आवाहन है की इस जगह पर आपको हिंदीभाषी इस जालस्थल से क्या अपेक्षांएं है तथा आपकी अपेक्षांओं पर हिंदीभाषी कितना खरा उतर रहा है इस बारे में लिखे|
कागज : एक राष्ट्रीय संपत्ति
प्रेषक सुरेश चिपलूनकर ( 1 जुलाई, 2007 - 11:30 ) ।
सन २००४ के आम चुनाव भारत के लिये बेहद महत्वपूर्ण साबित हुए हैं, राजनीतिक दृष्टिकोण से नहीं बल्कि पर्यावरणीय दृष्टिकोण से, क्योंकि विश्व के इन सबसे बडे चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों का देशव्यापी उपयोग किया गया, जिसके का
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देश बनाने के लिये चाहिये क्रांतिकारी युवा वर्ग
प्रेषक सुरेश चिपलूनकर ( 7 जून, 2007 - 19:44 ) ।
देश, जितना व्यापक शब्द है, उससे भी अधिक व्यापक है यह सवाल कि देश कौन बनाता है ? नेता, सरकारी कर्मचारी, शिक्षक, मजदूर, वरिष्ठ नागरिक, साधारण नागरिक.... आखिर कौन ?
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नेहरू की विदेश नीति और पंचशील
प्रेषक व्यवस्थापक ( 3 जून, 2007 - 19:33 ) ।
पंडित जवाहरलाल नेहरू की पंचशील और विदेश नीति पर शशि थरूर के विचार-
जवाहरलाल नेहरु ने भारत की विदेश नीति को एक ऐसे अवसर के रुप में देखा जिसमें वे अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रुप में स्थापित कर सकें.
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