समीक्षा
वर्षा का एक कालजयी गीत
प्रेषक सुरेश चिपलूनकर ( 30 जून, 2007 - 13:36 ) ।
देश के कुछ हिस्सों में बारिश ने अपनी खुश-आमदीद दर्ज करवा दी है, और कुछ में सौंधी खुशबुओं ने समाँ बाँधना शुरु कर दिया है । बरसात के मौसम पर हिन्दी फ़िल्मों मे दर्जनों गीत हैं, बारिश तो मानो गीतकारों के लिये एक "पार्टी" की तरह होती है, एक
महात्मा गांधी या शहीद भगत सिंह
प्रेषक आजाद ( 25 जून, 2007 - 10:22 ) ।
एक का मार्ग शान्ति का तो दूसरे का क्रान्ति का! आपको कौन सा मार्ग पसन्द है?
आज़ादी के छह दशक बाद हिंदी साहित्य
प्रेषक व्यवस्थापक ( 3 जून, 2007 - 19:51 ) ।
भारत की आज़ादी के छह दशकों में हर चीज़ में बदलाव आया है -सियासत में, विचारधाराओं में, समाज में, महिलाओं की स्थिति में. लेकिन साहित्य ने इन परिवर्तनों को किस तरह से लिया है. क्या ये परिवर्तन साहित्य में दिखाई पड़ते हैं और किस तरह?
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नेहरू की विदेश नीति और पंचशील
प्रेषक व्यवस्थापक ( 3 जून, 2007 - 19:33 ) ।
पंडित जवाहरलाल नेहरू की पंचशील और विदेश नीति पर शशि थरूर के विचार-
जवाहरलाल नेहरु ने भारत की विदेश नीति को एक ऐसे अवसर के रुप में देखा जिसमें वे अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रुप में स्थापित कर सकें.
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