अनुभव

आनन्‍द की खोज


मानव इस संसार रूपी मरूभूमि में बार-बार भागता है, दौड़ता है, भटकता है और थक-हार जाता है। कहीं कोई सारवस्तु उसे नहीं मिलती। अनेकों संकल्प-विकल्पों से लालायित होकर भागता है और अंततोगत्वा वहां पहुंचने से पूर्व ही उसे आभास हो जाता है कि य

प्रेरक प्रसंग - छोटा या बड़ा


मगनबाड़ी आश्रम में महात्मा गाँधी ने एक बार यह योजना बनाई कि सबके जूठे बरतन बारी-बारी से दो-तीन व्यक्ति मांजा करें । इससे आश्रमवासियों में प्रेम भाव बढेगा तथा एक दूसरे के बर्तन साफ करने से जो घृणा होती है उससे भी छुटकारा मिलेगा ।

गुरू के बिना ईश्‍वर प्राप्ति


सहजो कारज जगत के, गुरू बिन पूरे नाहिं।
हरि तो गुरू बिन क्‍यों मिलें, सोच समझ मन माहिं।।
सहजो बाई के विचारानुसार गुरू के बिना ईश्‍वर प्राप्ति असम्‍भव है। आपके विचार?

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