महगाई इस कदर बढ गई,
चीनी मुह को कडवा कर गई,
देसी घी विलुप्त हो गया,
बटूआ अपना खाली है.
काहे की दीवाली है
लगी आग तो तेल मे
काला बाजारी के खेल मे
दाल का खाना स्वप्न हो गया
खाली अपनी थाली है
काहे की दीवाली है
दिया-पटाखा, खील बताशा
मुंशी प्रेमचंद के उपन्यासों की सूची :
१. कृष्णा (सन् १९००, मूल रूप से उर्दू में )
२. प्रतिज्ञा
३. प्रेमा (सन् १९०३ में प्रकाशित,प्रतिज्ञा उपन्यास का संशोधित,परिवर्धित रूप, सर्वप्रथम यह उर्दू में हमखुमाँ और हमकबाब नाम से प्रकाशित )
मुंशी प्रेमचंद ने चार सौ से अधिक कहानियाँ लिखी हैं । उनके प्रमुख कहानी संग्रह निम्नानुसार हैं :
१. मानसरोवर
२. सप्त सरोज
३. नवनिधि
४. सप्त सुमन
५. प्रेम-पूर्णिमा
६. प्रेम द्वादशी
७. प्रेम तीर्थ ।
एक यात्री एक निर्जन पहाड़ी स्थल से गुजर रहा था । अचानक उसने देखा कि सामने से एक पागल, मदमस्त हाथी बड़ी तेजी से उसकी ओर बढ़ा आ रहा है । उसे देख कर यात्री विपरीत्त दिशा में भागने लगा । हाथी भी उसके पीछे भागने लगा । यात्री ने अपनी गति दुगुनी
मनुष्य के व्यक्तित्व में सबसे बड़ा अंतर्द्वन्द्व इस मान्यता से पैदा होता है कि उसका शरीर और उसकी आत्मा विरोधी सत्य हैं । यह स्वीकृति आधारभूत रूप से मनुष्य को विभाजित कर देती है । फिर स्वभावत: इन दोनों विभाजित खेमों में संघर्ष और कल
हिंदी साहित्य में मनोवैज्ञानिक उपन्यासों की रचना पर्याप्त संख्या में हुई है । लेकिन इस क्षेत्र में अभी भी बहुत कुछ लिखा जाने को है । हम चाहेंगे कि जागरुक पाठक, जिनकी रुचि हिंदी साहित्य में है और जिन्होंने किसी ऐसे उपन्यास को हिंद
भाषा, साहित्य और संस्कृति की वेब-पत्रिका सृजनगाथा डॉट कॉम, काव्यांजलि (बहुभाषीय एवं भारतीय संस्कृति के संवर्धन हेतु प्रतिबद्ध रेडियो सलाम नमस्ते, डलास, अमेरिका) के संयुक्त तत्वाधान में हिंदी के प्रभापुरुष एवं गीतकार स्व.
हिन्द-युग्म यूनिकवि एवम् यूनिपाठक प्रतियोगिता के आयोजन की यह सातवीं उद्घोषणा है। हर बार प्रतियोगिता में नये आकर्षण जुड़ते रहते हैं। हमारी कोशिश रहती है कि अधिक से अधिक लेखकों और पाठकों को कुछ न कुछ भेंट कर पायें। चूँकि हमारा सा
भारत की अर्थव्यवस्था में पिछले साल 9.4 प्रतिशत की रिकॉर्ड वृद्धि हुई, जो करीब दो वर्षों में सबसे तेज दर है । परंतु आगामी वर्ष में वृद्धि का स्तर कुछ कम हो सकता है ।