सवालजवाब

ओशो दर्शनशास्‍त्री नहीं तर्कशास्‍त्री।


ओशो को दर्शनशास्‍त्री ना कहकर तर्कशास्‍त्री कहना उपयुक्‍त रहेगा। ना उनकी कोई राह, न उनका कोई सिद्धांत, बस तर्क से अपनी बात को सही सिद्ध करना मात्र उनका लक्ष्‍य लगता है। ''आज एक विचार प्रकट किया तो कल अपने ही विचारों को अपनी वाकपटुत

''सिनेमा में बढ़ती अश्‍लीलता'' जिम्‍मेंदार कौन?


राजू- ''पापा'' आप कैसे कह सकते हैं कि ये पुरानी फिल्‍म है।
पापा- ''बेटा'' हीरों-हीरोईन कपड़े जो पहने हैं।
सिनेमा में बढ़ती अश्‍लीलता के जिम्‍मेंदार फिल्‍म निर्माता हैं या प्रशासन अथवा प्रजा अर्थात हम।

हिंदीभाषी से आपकी अपेक्षांएं |


हिंदीभाषी के सभी सदस्योंसे यह आवाहन है की इस जगह पर आपको हिंदीभाषी इस जालस्थल से क्या अपेक्षांएं है तथा आपकी अपेक्षांओं पर हिंदीभाषी कितना खरा उतर रहा है इस बारे में लिखे|

आज़ादी के छह दशक बाद हिंदी साहित्य


भारत की आज़ादी के छह दशकों में हर चीज़ में बदलाव आया है -सियासत में, विचारधाराओं में, समाज में, महिलाओं की स्थिति में. लेकिन साहित्य ने इन परिवर्तनों को किस तरह से लिया है. क्या ये परिवर्तन साहित्य में दिखाई पड़ते हैं और किस तरह?

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