Shivashtakam
prabhum praana naatham, vibhum vishwanaatham
jagan naatha naatham, sadaananda bHaajam
bHavad bHavya bHooteshwaram bHoota naatham
sHivam sHankaram, sHambhu mesha na meede
gale runda maalam, tanau sarpa jaalam
mahaa kaala kaalam, ganeshaadi paalam
jataa joota gango, tarangai visisHyam
sHivam sHankaram, sHambhu mesha na meede
mudaa-maakaram mandanam manda-yantam
mahaa-mandalam bHasma bHoosHaadHarantam
anaadim hYapaaram mahaa mohamaaram
sHivam sHankaram, sHambhu mesha na meede
vataadho nivaasam mahaattaatahaasam
एक बार स्वामी विवेकानंद से एक जापानी विद्वान ने पूछा कि क्या कारण है कि भारत में वेद, उपनिषद्, गीता, विभिन्न दर्शन आदि की रचना हुई, लेकिन फिर भी यहाँ के लोग दीन-हीन, दरिद्र और अंध-विश्वासी हैं ?
ओशो की डायरी से चुने गए कुछ विचार-बिंदु :
१.सत्य सरल है, शेष सब जटिल है, लेकिन हम सरल नहीं हैं, इसलिए सत्य को पाना कठिन हो जाता है ।
एक यात्री एक निर्जन पहाड़ी स्थल से गुजर रहा था । अचानक उसने देखा कि सामने से एक पागल, मदमस्त हाथी बड़ी तेजी से उसकी ओर बढ़ा आ रहा है । उसे देख कर यात्री विपरीत्त दिशा में भागने लगा । हाथी भी उसके पीछे भागने लगा । यात्री ने अपनी गति दुगुनी
मनुष्य के व्यक्तित्व में सबसे बड़ा अंतर्द्वन्द्व इस मान्यता से पैदा होता है कि उसका शरीर और उसकी आत्मा विरोधी सत्य हैं । यह स्वीकृति आधारभूत रूप से मनुष्य को विभाजित कर देती है । फिर स्वभावत: इन दोनों विभाजित खेमों में संघर्ष और कल
धर्म के प्रति आधुनिक मन में बड़ी उपेक्षा है । और यह अकारण भी नहीं है । धर्म का जो रूप आंखों के सामने आता है, वह न तो रुचिकर ही प्रतीत होता है और न ही धार्मिक । धार्मिक से अर्थ है : सत्य, शिव और सुंदर के अनुकूल । तथाकथित धर्म वह वृत्ति ही नह